Bachelor of Education (B.Ed.)
Preparing committed educators with pedagogical excellence, ethical grounding, and scientific temperament.
विद्यां ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम् । पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम् ॥
विद्या विनय देती है; विनय से पात्रता, पात्रता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख प्राप्त होता है।
Principal's Desk
भारतीय परम्परा में शिक्षा केवल सूचनात्मक बौद्धिक सम्पन्नता ही नहीं देती वह हमें स्व से ऊपर उठ कर समष्टि के हितों की संरक्षा का दायित्व बोध भी देती है । शिक्षा संस्कृति का अंग ही नहीं, सांस्कृतिक जीवन और मानव मूल्यों की नींव भी है । संस्कृति और मानव मूल्य दो अलग चेतनाएँ नही हैं। मूल्य आधारित शिक्षा का अर्थ है- उसे निर्मम व्यावसायिकता से अलग करना और स्वतंत्रता एकता बंधुता जैसे मूल्यों से जोड़ना क्योंकि इन्हीं मूल्यों से दूसरे सकारात्मक मूल्य निकलते है ।
शिक्षा-प्रशिक्षण में मूल्यों की इस संरक्षा में हमें भारतीय चिन्तन परम्परा के ’सत्यम शिवम सुन्दरम' को स्वीकारना होगा ।
शिक्षा का मूल उद्देश्य है- ज्ञान और उसका प्रसार। ब्रहम के रूपक द्वारा उपनिषदों में इसे स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि ब्रहम के तीन रूप है- सत्यं ज्ञानं अनन्तं। इसी के अनुरूप मानव आत्मा के नीचे तीन रूप है- सत्य यादि हम हैं, ज्ञान यानि हम जानते हैं और अनन्त यानि हम व्यक्त करते हैं। पहले में अस्तित्व रक्षा की आकांक्षा और चेष्टा, दूसरे में ज्ञानर्जन की जिज्ञासा और तीसरे में अपने अन्तर में प्रकाश की कामना अर्थात् मनुष्य के मन में ऐश्वर्य का प्रकाश। लेकिन क्या ऐसा हो पा रहा है क्या समाज की नयी बौध अपने सामाजिक राष्ट्रीय और मानवीय दायित्वों के प्रति सजग है ।
इन जिज्ञासाओं के सकारात्मक उत्तर अभी मुश्किल से मिलते हैं या नहीं मिलते, तो निश्चित है कि हमारे यहाँ अभी शिक्षा का संस्कार अधूरा है। इन्हीं शब्दों अर्थों के आलोक या अंधकार में युवा शिक्षित समाज शिक्षा शिक्षक शिष्य से निर्मित आज की संस्थिति कविता रूपक में कुछ इस तरह बयां हो सकती है –
फूलों के हाथ
हाथ में हथियार आ गये
हम घर में थे
और
घर में बाजार आ गये
खुशियों थी
पर मिले ही नहीं
उड़ती भला ये कैसे
घर में नहीं था कुछ तो
त्यौहार आ गये।
इन्हीं अवधारणाओं और मूल्यों पर आधारित शिक्षा के क्षेत्र में निरन्तर कार्यरत यह काॅलेज समाज को नयी दिशा देने हेतु अग्रसर है, और हमें आशा है कि हमारा यह प्रयास समाज को दिशा दिखाने में अवश्य सफल होगा।
डॉ उषा शाही
प्राचार्या
सूरजमल अग्रवाल बी०एड० कॉलेज, किच्छा
Secretary's Message

The quality of teachers determines the quality of education. The 21st century educator must combine scientific outlook, inclusive sensitivity and value-based teaching.
The institution emphasizes ICT integration, communication skills and inclusive education practices.
(S. N. Sharma)
Secretary
Course Details
B.Ed. (Bachelor of Education)
Duration: 2 Years
Seats: 100
Affiliation: Kumaun University, Nainital
Eligibility:
- Graduation in any stream from recognized university.
- Qualification in B.Ed entrance examination.
Faculty
| S.No. | Name | Designation |
|---|---|---|
| 1 | Mrs. Usha Shahi | Principal |
| 2 | Dr. Gaurav Singh | Assistant Professor |
| 3 | Mr. Sunil Manhor Pant | Assistant Professor |
| 4 | Mr. Surya Pratap Sharma | Assistant Professor |
| 5 | Mr. Kamlesh Mathur | Assistant Professor |
| 6 | Ms. Manisha Mawri | Assistant Professor |
| 7 | Mr. Surendra Kumar | Assistant Professor |
| 8 | Mr. Anil Kumar Sharma | Assistant Professor |
| 9 | Mrs. Lavi Saxena | Assistant Professor |
| 10 | Mr. Girish Kumar | Assistant Professor |
| 11 | Mr. Navneet Kaushik | Assistant Professor |
| 12 | Mrs. Anshu Sharma | Assistant Professor |
| 13 | Ms. Neetu Sagar | Assistant Professor |
| 14 | Ms. Babita Devi | Assistant Professor |
| 15 | Mr. Rajneesh Gir | Assistant Professor |
| 16 | Mr. Rashmi Sharma | Assistant Professor |
Gallery
Affiliation
NCTE Approval
Institute: Surajmal Agarwal Private Kanya Mahavidyalaya
Intake: 100
Recognition Date: 31/08/2009
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